Miya woh din gaye shayari

 




میاں وہ دن گئے اب یہ حماقت کون کرتا ہے 

وہ کیا کہتے ہے ہا محبّت کون کرتا ہے

کوئی جنت کا طالب ہے کوئی گم سے پریشا ہے

غرض سجدے کراتی ہے عبادت کون کرتا ہے




मिया वोह दिन गए अब ये हिमाकत कौन करता है

वोह किया कहते है हा मोहब्बत कौन करता है

कोई जन्नत का तालिब है कोई ग़म से परेशा है

गरज सजदे कराती है इबादत कौन करता है

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